2014 से 2025: भारत में बड़े पैमाने पर विकास या सिर्फ अप्रैल फूल?

2014 से 2025 का सफर भारत के लिए बदलावों और बड़े फैसलों का दौर रहा है। एक तरफ, सरकार ने कई बड़े सुधार किए, तो दूसरी तरफ, कुछ वादे कागज़ों पर ही सिमट कर रह गए। सवाल यह उठता है कि क्या यह दशक असली विकास की मिसाल है या फिर जनता के लिए “अप्रैल फूल” जैसा मज़ाक? आइए, इस सफर की सच्चाई को टटोलते हैं।

1. आर्थिक विकासया या सिर्फ अप्रैल फूल : 5 ट्रिलियन डॉलर की हकीकत या सिर्फ सपना?

विकास के दावे:

  • 2014 में सरकार ने “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों की शुरुआत की।

  • 2017 में GST लागू किया गया, जिससे टैक्स प्रणाली को सुधारने का दावा किया गया।

  • 2020 में कोरोना महामारी के बाद सरकार ने बड़े आर्थिक पैकेज घोषित किए।

  • 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का वादा किया गया।

अप्रैल फूल,हकीकत:

  • जीडीपी ग्रोथ में उतार-चढ़ाव रहा, 2020 में लॉकडाउन के कारण भारी गिरावट आई।

  • बेरोज़गारी दर बढ़ी, खासकर नोटबंदी और कोविड के बाद।

  • महंगाई ने जनता की जेबें खाली कीं, पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ते रहे।

👉 फैसला: सुधार हुए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई वादे पूरे नहीं हुए।

2. इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास की गंगा या अधूरे पुल?

विकास के दावे:

  • स्मार्ट सिटी मिशन (2015): 100 शहरों को हाई-टेक और आधुनिक बनाने का ऐलान।

  • बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (2017): मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना।

  • भारतमाला प्रोजेक्ट: हाईवे और एक्सप्रेसवे को तेज़ी से विकसित करने का लक्ष्य।

हकीकत:

  • स्मार्ट सिटी मिशन में धीमी प्रगति, कई प्रोजेक्ट अधूरे।

  • बुलेट ट्रेन अभी भी निर्माणाधीन, 2025 तक पूरा होने का दावा।

  • सड़कों का निर्माण तेज़ हुआ, लेकिन कई जगह भ्रष्टाचार और घटिया क्वालिटी की शिकायतें।

👉 फैसला: इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कुछ ठोस काम हुए, लेकिन कई वादे अभी अधूरे।

3. रोज़गार और शिक्षा: युवाओं का सपना टूटा या पूरा हुआ?

वादे:

  • हर साल 2 करोड़ नौकरियाँ देने का दावा किया गया।

  • स्टार्टअप इंडिया से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना बनी।

  • नई शिक्षा नीति (2020) लागू हुई, जिसमें स्कूली शिक्षा को सुधारने की कोशिश की गई।

हकीकत:

  • बेरोज़गारी दर अब भी चिंता का विषय, खासकर सरकारी नौकरियों में भर्ती धीमी।

  • स्टार्टअप्स बढ़े, लेकिन कई कंपनियाँ आर्थिक संकट में बंद हो गईं।

  • शिक्षा नीति लागू हुई, लेकिन सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।

👉 फैसला: युवाओं को नौकरियों के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन स्टार्टअप्स ने कुछ राहत दी।

4. किसान और ग्रामीण भारत: समृद्धि या संघर्ष?

सरकार के वादे:

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से किसानों को सीधे आर्थिक सहायता।

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने के वादे।

  • कृषि सुधार कानून (2020) लाए गए, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलने का दावा किया गया।

हकीकत:

  • कृषि कानूनों का भारी विरोध, जिसे बाद में सरकार को वापस लेना पड़ा।

  • किसानों को अब भी अपनी फसलों का सही दाम नहीं मिल रहा।

  • बिजली, पानी और खाद पर महंगाई बढ़ी, जिससे छोटे किसानों की हालत खराब हुई।

👉 फैसला: योजनाएँ बनीं, लेकिन किसानों की असली स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ।

5. डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजी: असली प्रगति या दिखावा?

विकास:

  • UPI और डिजिटल बैंकिंग ने ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ाया।

  • 5G नेटवर्क लॉन्च हुआ और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हुआ।

  • आधार और डिजिलॉकर जैसी सुविधाएँ बढ़ीं।

हकीकत:

  • डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़े, लेकिन साइबर क्राइम और डेटा सुरक्षा के मुद्दे सामने आए।

  • इंटरनेट की स्पीड में सुधार हुआ, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी नेटवर्क की समस्या है।

👉 फैसला: डिजिटल इंडिया की दिशा में असली विकास हुआ, लेकिन साइबर सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

निष्कर्ष: विकास की सच्चाई या अप्रैल फूल का खेल?

2014 से 2025 तक भारत में कई बड़े बदलाव हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में असली प्रगति हुई, लेकिन कई वादे सिर्फ नारों तक सीमित रह गए। सरकार ने योजनाएँ तो बनाई, लेकिन हर योजना का असल फायदा जनता तक पहुँचा या नहीं, यह सवाल अब भी बना हुआ है।

तो क्या भारत 2014 से 2025 तक असली विकास कर पाया? या यह सब सिर्फ चुनावी वादों का खेल था?

👉 आपकी राय क्या है? हमें कमेंट में बताइए!

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